November 29, 2021

ऐलनाबाद को जींद के पैटर्न पर जीतने की भाजपा की कोशिश अंत तक रहेगी बरकरार।

धर्मपाल वर्मा
दक्ष दर्पण समाचार सेवा
चंडीगढ़
भारतीय जनता पार्टी ने पिछली सरकार में जींद का उपचुनाव जिस पैटर्न पर लड़ा, परिस्थितियां यह बता रही है कि उसने ऐलनाबाद को भी लगभग उसी लाइन पर लड़ने और जीतने की जो योजना बनाई है ।यदि भारतीय जनता पार्टी को इसमें सफलता हासिल हुई तो इसका श्रेय मुख्यमंत्री मनोहर लाल को सीधे तौर पर इसलिए जाएगा की उम्मीदवार के चयन से लेकर चुनाव प्रबंधन तक का सारा काम उनकी समझ से हो रहा है।
पाठकों को बता दें कि जब जींद के , इंडियन नेशनल लोकदल के पूर्व विधायक डॉक्टर हरिचंद मिड्ढा का निधन हुआ तो उसी समय मुख्यमंत्री ने उनके दत्तक पुत्र डॉक्टर कृष्ण मिड्डा को भाजपा में शामिल कराने और उपचुनाव में उम्मीदवार बनाने का मन बना लिया था। उपचुनाव की घोषणा से पहले ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने अपने विश्वस्त पूर्व मंत्री मनीष गोवर ग्रोवर को यह जिम्मेदारी सौंपी कि वे कृष्ण मिढा को भारतीय जनता पार्टी में शामिल कराएं ।श्री ग्रोवर इस काम में सफल हुए और उन्होंने श्री कृष्ण मिड्ढा को भारतीय जनता पार्टी की सदस्यता दिलवाई ।बाद में जब चुनाव की घोषणा हुई तो उन्हें भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतारा गया ।उस समय भारतीय जनता पार्टी का मुकाबला जननायक जनता पार्टी से था ।जेजेपी ने दिग्विजय चौटाला को उम्मीदवार बनाया तो कांग्रेस के उम्मीदवार थे रणदीप सुरजेवाला ।उस चुनाव के परिणाम आए तो यह सीट भारतीय जनता पार्टी ने जीती और जेजेपी मुकाबले में हारी। लेकिन चुनाव परिणाम आने से पहले यहां मीडिया ने भी इस बात को खूब हाइट किया था कि यह चुनाव जननायक जनता पार्टी के दिग्विजय सिंह जीत सकते हैं या जीतने वाले हैं। इस चुनाव में बीजेपी दूसरे नंबर पर रही ‌कांग्रेस उम्मीदवार को तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा।
हम यदि ऐलनाबाद चुनाव और वहां की परिस्थितियों पर गौर करें तो यहां भी कुछ चीजें जींद उपचुनाव से मिलती-जुलती नजर आती हैं । ऐलनाबाद के लिए भी मुख्यमंत्री ने पहले से ही उम्मीदवार तय कर लिया था ।
दक्ष दर्पण ने अपनी एक रिपोर्ट में बहुत पहले यह दावा किया था कि यदि कालका में उपचुनाव होता है तो भारतीय जनता पार्टी विनोद शर्मा को और ऐलनाबाद में गोविंद कांडा को उम्मीदवार बना सकती है। जाहिर है मुख्यमंत्री पहले से ही गोविंद कांडा के नाम पर फोकस करके चल रहे थे। आप जानते हैं कि कालका में उपचुनाव की नौबत आई ही नहीं।इस समय चुनाव की जो परिस्थितियां बन रही है उसमें इंडियन नेशनल लोकदल के उम्मीदवार और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार में उसी तरह मुकाबला नजर आ रहा है जैसे जींद में भारतीय जनता पार्टी और जननायक जनता पार्टी के बीच रहा ।यदि इस चुनाव में भी भारतीय जनता पार्टी जींद की तरह चुनाव जीत जाती है तो फिर पूरे प्रदेश में राजनीतिक हालात बड़ी तेजी से बदलेंगे और इसका सबसे बड़ा नुकसान किसान आंदोलन पर पड़ेगा ।क्योंकि किसान आंदोलन से जुड़े जो लोग यह दावा कर रहे थे कि भारतीय जनता पार्टी के लोगों को गांव में भी नहीं घुसने दिया जाएगा और यदि वहां भारतीय जनता पार्टी कामयाब होकर उभरती है तो सरकार पक्ष के लोग यह मानकर चल रहे हैं कि फिर किसान आंदोलन से जुड़े लोग बिलों में घुस जाएंगे ।उधर पंजाब और उत्तर प्रदेश में हो रहे विधानसभा चुनाव और खेतों में बढ़ रहे काम को देखते हुए भी आंदोलन प्रभावित होता दिख रहा है। संयुक्त किसान मोर्चा के 40 नेताओं में से 38 नेता पंजाब से ताल्लुक रखते हैं और यह सब महत्वकांक्षी लोग हैं  जिनका पंजाब के चुनाव में न केवल हस्तक्षेप रहेगा बल्कि इनमें से काफी लोग चुनाव भी लड़ सकते हैं ।ऐसे में इन्हें दिल्ली बॉर्डर पर से चलकर पंजाब लौटना ही पड़ेगा। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद रास्ता खुलवाने के नाम पर जो परिस्थितियां उभर रही है उससे भी आंदोलन प्रभावित हो रहा है।
अमर हमसे एक बात कहते आ रहे हैं कि ऐलनाबाद में भारतीय जनता पार्टी सुखद स्थिति में इसलिए है कि यदि इंडियन नेशनल लोकदल के उम्मीदवार अभय सिंह चौटाला चुनाव जीत भी जाते हैं तो उनकी सेहत पर कोई फर्क पड़ने वाला नहीं है क्योंकि उसके बाद भारतीय जनता की पार्टी की तरफ से एक बयान आएगा कि यह सीट पहले ही इंडियन नेशनल ‌लोकदल के पास थी पिछले चुनाव में भी हम दूसरे नंबर पर हारे थे तो इस बार भी दूसरे नंबर पर हारे हैं।  भारतीय जनता पार्टी का मकसद ऐलनाबाद में कांग्रेस को तीसरे नंबर पर खिसकाना भी है। जिस तरह से जींद उपचुनाव में प्रबंधन, नीति और कूटनीति के मामले में सारा हस्तक्षेप  मुख्यमंत्री के हाथ में था उसी तरह का काम ऐलनाबाद में भी हो रहा है ।यहां मुख्यमंत्री के विश्वासपात्र लोग ही चुनाव को संभाले हुए हैं। यही कारण है कि भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को स्टार प्रचारकों की सूची में रखा गया है उनमें अधिकांश ऐसे नेता हैं जिनसे मुख्यमंत्री का बहुत अच्छा तालमेल नहीं है ,वे इस चुनाव में 1 दिन भी प्रचार करने नहीं आए। इनमें कृष्ण पाल गुर्जर राव इंद्रजीत सिंह रमेश कौशिक हो चाहे डॉ अरविंद शर्मा हो। हरियाणा प्रदेश भाजपा के पूर्व अध्यक्ष सुभाष बराला को ही मुख्यमंत्री ने इस चुनाव का प्रभारी बनाया था पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष ओमप्रकाश धनखड़ ऐलनाबाद में भी उसी भूमिका में नजर आ रहे हैं जिस भूमिका में बरोदा में थे। इस बात को तो कोई इनकार नहीं कर सकता कि गोविंद कांडा को मुख्यमंत्री ने उम्मीदवार बनाया है किसी और ने नहीं।
अब जिस तरह से ऐलनाबाद उपचुनाव में कांग्रेस के पिछड़ने और उससे भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार के मजबूत होने की खबरें आ रही हैं और कुछ लोग भाजपा और इनेलो में कांटे का मुकाबला होने की बात कह रहे हैं उसे देखते हुए यह कहा जा सकता है कि ऐलनाबाद में भी भारतीय जनता पार्टी बाजी मार ले गई तो फिर हम यही कहेंगे कि मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जींद के फार्मूले पर ही ऐलनाबाद को जीत लिया है।
ऐलनाबाद के चुनाव में एक हालात शुरू से यह रहे हैं कि यहां चुनाव अभय सिंह चौटाला के इर्द-गिर्द ही घूम रहा है। एक तरफ अभय सिंह के समर्थक हैं दूसरी तरफ उनके विरोधी। पहले यह विरोधी दो बराबर बराबर पक्षों में बंटे हुए थे  अब इस प्रचार के बाद कि भूपेंद्र सिंह हुड्डा कथित तौर पर कांग्रेस उम्मीदवार पवन बेनीवाल की नियत से मदद नहीं कर रहे हैं और उनका पलड़ा बीजेपी के उम्मीदवार की तरफ झुक रहा है ,अभय सिंह के विरुद्ध कांग्रेस के उम्मीदवार पवन बेनीवाल के पक्ष में लगे काफी लोग जब यह मानने लग जाए कि कांग्रेस के उम्मीदवार की स्थिति बहुत मजबूत नहीं है तो इसी विचार से भारतीय जनता पार्टी की स्थिति मजबूत हो जाती है क्योंकि ऐसे लोग उसी उम्मीदवार के पक्ष में जाएंगे जो उन्हें अभय सिंह को हराने की स्थिति में नजर आएगा। भारतीय जनता पार्टी के लोग इस समय इसी स्थिति को बनाने बताने में लगे हुए हैं। जूही यह प्रचार होगा कि मुकाबला भाजपा और इनेलो के बीच में है इसी से कांग्रेस का नुकसान होना शुरू हो जाएगा। यह प्रक्रिया और दो-तीन दिन चल गई तो उन लोगों की बात सच साबित होने लगेगी जो अब ऐलनाबाद में भाजपा और इनेलो में कांटे का मुकाबला बताने लगे हैं। यदि किसी कारण से ऐलनाबाद में भारतीय जनता पार्टी जीत हासिल करने में सफल हो गई तो फिर इसका असर हरियाणा की राजनीति पर ही नहीं गठबंधन सरकार पर और किसान आंदोलन पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है। ऐलनाबाद की भाजपा की जीत से भारतीय जनता पार्टी को एक साथ दो विधायक मिल जाएंगे। भारतीय जनता पार्टी ने ऐलनाबाद में जिस सुनियोजित तरीके से और विपरीत परिस्थितियों में संयम के साथ चुनाव लड़ने का प्रमाण दिया है उससे सभी राजनीतिक दलों को सीख लेनी चाहिए । चुनाव आयोग के नए फैसले और प्रावधान से भी भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार को लाभ हो सकता है क्योंकि पहले जहां चुनाव प्रचार 48 घंटे पहले समाप्त हो जाता था ,अब यह बढ़ाकर 72 घंटे कर दिया गया है आज चुनाव प्रचार बंद हो रहा है जबकि मतदान 30 अक्टूबर को होना है।

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