November 29, 2021

फिर लौटेगी देखना, आबोहवा पंजाब। इसकी माटी आब है, जगते देखे ख्वाब।।

मेरा पंजाब

भू पावन दशमेश की,
गांव गांव गुरु द्वार।
सब मिलकर हम नमन करें,
यहां समृद्धि अपार।।

पंज प्यारे अमृत छकेऺ,
अखंड खालसा आन।
मस्त पवन इतरा कहे,
पंचनद स्वर्ग महान।।

भऺगड़े की तो तान है,
थिरकें रांझे हीर।
दिव्य मलय ड्रग राज अब,
विषमय क्यों सब खीर।।

फिर लौटेगी देखना,
आबोहवा पंजाब।
इसकी माटी आब है,
जगते देखे ख्वाब।।

मैं ले कलम नमन करूं,
हिय से सत श्री अकाल।
कुछ ऐसा तू कर यहां,
हों सुख सभी बहाल।।

भारती भाई।
कवि अग्र कुल में जन्मे साहित्य शिल्पी हैं-संपादक।

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