September 19, 2021

एनडीसी,म्युटेशन,व ऑनलाइन व्यवस्था से बढ़ी जनता की परेशानी व भ्र्ष्टाचार:- ओंकार सिंह चिराग तले अंधेरा, एक छापा नगरपरिषद अम्बाला छावनी भी जरूरी। सीएससी सेंटर वालो की चांदी, जनता बनी बलि का बकरा। इनैलो शीघ्र अम्बाला छावनी में लगाएगी म्युटेशन,एनडीसी व टैक्स दरुस्ती कैम्प।

दक्ष दर्पण समाचार सेवा

 चण्डीगढ

ऑनलाइन व्यवस्था के नाम पर नगर निकायों में अनापत्ति प्रमाणपत्र, म्युटेशन,टैक्स व प्रोपर्टी आई.डी. के नाम पर पनपे भ्र्ष्टाचार व जनता की परेशानी को जनता से लाइसेंसी लूट करार देते हुए इनैलो प्रदेश प्रवक्ता ओंकार सिंह ने कहाकि बहुत ही दुख व अफसोस की बात है कि अपने आप को गब्बर की संज्ञा देने वाले स्थानीय निकायमंत्री के अपने मंत्रालय और अपने ही हल्के की व्यवस्था का आलम यह है कि जनता नगर निकायों में जाति प्रमाणपत्र, रिहायशी प्रमाणपत्र, शादी प्रमाणपत्र, आधारकार्ड दरुस्त करने जैसी आधारभूत सेवाओँ और अनापत्ति प्रमाणपत्र, प्रॉपर्टी आई.डी बनाने, म्युटेशन व इन सेवाओं में आपत्तियां ठीक करवाने के लिए दर दर भटक रही है। इस सारी अव्यवस्था के कारण अधिकतर अस्थाई व स्थाई कर्मचारियों की भ्र्ष्टाचार के कारण पों बारह तो हो ही रही है साथ ही सीएससी केंद्रों की भी चांदी हो रही है। हैरान करने वाली बात यह है कि स्थानीय निकाय मंत्री के अपने हल्के में नगरपरिषद में कैसे जनता को लूटा जा रहा है उसे प्रत्येक व्यक्ति जानता है लेकिन सबसे शक्तिशाली व सबसे ईमानदार मंत्री अनभिज्ञ है। गृहमंत्री द्वारा गुरुग्राम नगरनिगम में विसंगतियों को चलते छापा मारना एक अच्छी पहल है लेकिन यह शुरुआत अम्बाला छावनी व अम्बाला शहर से होती तो बहुत ही अच्छा होता। दूसरे शहरों पर कार्यवाही से पहले अपना शहर दरुस्त होना जरूरी है। यहाँ तो सारा अस्त व्यस्त हैं। चिराग तले अंधेरा सुना तो था लेकिन अम्बाला में इसका यथार्थ रूप है। कितनी ही विसंगतिया इनलो ने नगरपरिषद में संघर्ष के दम पर दूर कर ली है लेकिन अभी भी व्यवस्था में बहुत सी कमियां है। मौजूदा कार्यकारी अधिकारी व सचिव अपने कार्यो को अच्छे से करने में काफी हद तक सफल रहे हैं लेकिन निचले कर्मचारियों की नाकामी व गलत रवैये के कारण पूरा विभाग बदनाम है। पहले अनापत्ति प्रमाणपत्र के लिए रिहायशी 120 रुपए व व्यवसायिक 500 रुपये प्रतिवर्गगज वसूले जा रहे थे जिन्हें संघर्ष करके 50 रुपये व 200 रुपये प्रतिवर्गगज करवाया गया। मंडे बाज़ार में रेहड़ी-फड़ी वालो से पहले 200 व बाद में 300 रुपए प्रतिदिन अवैध वसूली की जा रही थी जिसे लम्बे संघर्ष के बाद इनैलो ने खत्म करवाया। म्युटेशन के नाम पर भोली-भाली जनता से 2000 रुपये प्रतिवर्ष के हिसाब से लेट फीस ली जा रही थी जबकि साधारण स्थिति में नगरपालिका अधिनियम की धारा 87 के अनुसार न्यूनतम 25 रुपये व अधिकतम 200 रुपये लेट फीस आ प्रावधान है। आरटीआई के सहारा लेकर उक्त फीस अधिकतम तीन हज़ार रुपये निश्चित की गई जबकि यह भी अनुचित है। जो छेत्र नगरपरिषद में सीमा विस्तार होने के कारण 2009 में नए शामिल हुए थे वहां के निवासियों से 10 वर्ष का इकट्ठा गृहकर वसूलना व म्युटेशन के नाम पर वसूली करने सर्वथा अनुचित है। यह नगरपरिषद व सरकार का कर्तव्य है कि नए शामिल छेत्रो की म्युटेशन निशुल्क होनी चाहिए व उनका टैक्स बिना ब्याज के किश्तों में प्राप्त करना चाहिए। बहुत अफसोस कि बात है कि स्थानीय निकाय मंत्री के अपने हल्के की जनता ही स्थानीय निकाय विभाग से परेशान हैं। मुख्यमंत्री हरियाणा माननीय खट्टर साहिब द्वारा पिछले वर्ष कोरोना महामारी से राहत की घोषणा करते हुए सरकारी विभागों के सभी किराएदारों को 2 माह का किराया माफ् किया था लेकिन अम्बाला छावनी में यह छूट नही दी गयी, संघर्ष करके यह छूट भी जनता को दिलाई गई। एनडीसी की राशि एकमुश्त जमा करवाने पर 10% छूट का प्रावधान है जो कि नही दी जा रही, इसके लिए भी संघर्ष जारी है ताकि जनता को राहत मिल सके। ऑनलाइन व्यवस्था में नगर निकायों में अनापत्ति प्रमाणपत्र, म्युटेशन,टैक्स व प्रोपर्टी आई.डी के दो पोर्टल कार्य कर रहे हैं, एक एनडीसी का व दूसरा टैक्स का, दोनो ही पोर्टल अर्बन लोकल बॉडी के है लेकिन दोनों में किसी प्रकार का तालमेल या सम्बन्ध नही है जिसके कारण एक पोर्टल पर जमा की गई रकम दूसरे पोर्टल पर जमा नही दिखती जबकि जनता का वास्ता दोनों से पड़ता है। प्रश्न यह उठता है कि विभाग दोनों प्रणालियों को एकीकृत क्यो नही करता ? यही भ्र्ष्टाचार का जन्म होता है। तहसील कार्यालय में जबसे ऑनलाइन व्यवस्था शुरू हुई है रजिस्ट्री करवाने के लिए व्यवस्था अधिक लम्बी व कष्टदाई हो गयी है। इंतकाल करवाने में शामिल भ्र्ष्टाचार को कौन नही जानता लेकिन बिल्ली सामने देखकर भी कबूतर की आंखे बंद है पता नही क्यों। सरकारी कार्यो वह ठेका कार्यो में जनधन की बर्बादी चरम पर है। इस सारे दृष्टिकोण पर जनता यह जानना चाहती हैं कि मंत्रियों व अधिकारियों की आंख कब खुलेगी ताकि जनता राहत की सांस ले सके एनडीसी, म्युटेशन,प्रोपर्टी आईडी,टैक्स व दोषपूर्ण व्यवस्था के कारण नगरनिकायो में भ्र्ष्टाचार पनप रहा है इसलिए यह व्यवस्था सुधरनी चाहिए।

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